मेरा मन करता विचरण, इस जग के अंधियारों में .
सुबक सुबक कर रोता रहता, उन यादों के गलियारों में.
सोचा करता रोज रात को, कल फिर एक नया सवेरा आयेगा.
बस एक रात का फासला और, कल शायद मुझे मेरा यार मिल जायेगा.
मन की इस हालत पर ये बेबस आँखे अक्सर रो दिया करती है .
जब वो इन आँखों से पूछा करता "क्या तुमने मेरे यार को देखा है?".
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nice !!
ReplyDeleteIndra ka blog!!!
ReplyDeleteMacha raha hai londha..
छुप रही थी वो तेरी ठरकी निगाहों से
ReplyDeleteऔर कह रही थी अबे जा मुह धो के आ
abe omi comment to kailas se pooch ke mat likh..
ReplyDeleteabe rehne de mera hi hai comment
ReplyDeletetujhe kya lagta hai tu or kailash ki kuch likh sakte hain kya